तुझे छोड़ में चल पड़ा
ढूँढ़ने घर हर जगह
खोज में में खो गया
खुद को पहचान न सका
रेहमत के दरिया में डुबाया मुझे
उस से जरिया बनाकर चलाया मुझे
पापा, पापा
बेटा में तेरा
तुझे छोड़ में जाऊ कहा
तू ही तो घर है मेरा
न था मुझे ये पता
बेटा में था ही तेरा
नज़र तेरी कभी न हटी
मेहफ़ूज़ हूँ तेरी परछाई में
पापा, पापा
बेटा में तेरा
तेरी आँखों की पुतली हूँ पापा
में – आँखों की पुतली हूँ पापा
तेरी आँखों की पुतली हूँ पापा
पराया न हूँ में – ठुकराया न तू ने
शर्मिंदगी से – निकाला है तू ने
गले लगाकर चूमा मुझे
मेरा लत्ता हटाकर लबादा दिया